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Karmabhoomi by Premchand

Karmabhoomi by Premchand

₹140

इस उपन्यास में प्रेमचंद ने देशभक्ति के बारे में बताया है और पोंगापंथी पर बहुत कड़ा प्रहार किया है। अमरकांत शुद्ध खादी पहनता है , चर्खा चलाता है और सामाजिक तथा सार्वजनिक कार्यो में बाद चढ़ कर हिस्सा लेता है। उसके पिता समरकांत तथा पत्नी सुखदा को उसका यह निठल्लापन अच्छा नही लगता है। समरकांत एक बड़े व्यापारी हैं , और वे उसे धन कमाने को प्रेरित करते हैं पर अमरकांत पिता का अनुचित तरीके से धन कमाने का विरोध करता है। अमरकांत के विचारों से प्रभावित होकर उसके पिता और उसकी पत्नी सुखदा का ह्र्दय परिवर्तन हो जाता है और वे स्वतंत्रता संग्राम में अमरकांतका साथ देने लगते हैं। हिन्दू धर्म की औपचारिकताओं का पालन करने वाले एक कमजोर ,युवा आदमी की कहानी।

11 months ago
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