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Class7 books
श्रीगुरुचरणार्पणम् भारत के ज्ञान, संस्कृति और प्राचीन वाड्मय को सुरक्षित रखने वाली संस्कृत भाषा हमारा मूल है, हमारा परिचय है और हमारी प्रगति का आधार है। आज एक ओर भारत के दर्शन, योग, ज्योतिष, चिकित्सा, वास्तु, साहित्य, गणित आदि विषयों का ज्ञान प्राप्त करने के लिए, दूसरी ओर अपनी परम सुव्यवस्थित व्याकरण एवं नवीन शब्द-निर्माण-क्षमता के कारण, संगणक के लिए उपयुक्ततम भाषा के रूप में, संस्कृत भाषा का ज्ञान अनिवार्य हो गया है। आज हमें संस्कृत के प्राचीन वाड्मय के अध्ययन तथा संस्कृत भाषा द्वारा अभिव्यक्ति, दोनों की आवश्यकता है। अत: संस्कृत-शिक्षण ऐसा हो जो विद्यार्थी को भाषा के साहित्यिक रूप और उसके व्यावहारिक स्वरूप दोनों से परिचित कराए। संस्कृत शिक्षण भाषा के चारों कौशलों-- श्रवण, वाचन, पठन और लेखन-- का विकास करे | छात्र भाषा का अवबोधन, उसका वाचन, उसमें चिन्तन कर सकें, उसमें संभाषण तथा रचनात्मक अभिव्यक्ति कर सकें। इन्हीं उद्देश्यों कौ पूर्ति हेतु प्रस्तुत पुस्तक- श्रृंखला बाल-संस्कृत-कण्णिका की रचना की गई है। सुधी शिक्षक बन्धुओं और छात्रों ने बाल-संस्कृत-कणिका को स्वीकारा और सराहा, अत: उनके प्रति हार्दिक आभार प्रकट करती हूँ। उनके उत्साहवर्धन के फलस्वरूप इन पुस्तकों को नए रूप में प्रस्तुत करते हुए मुझे अपार हर्ष हो रहा है। इस श्रृंखला की पुस्तकें हैं-- 4. बाल-संस्कृत-कणिका -- प्रवेशिका (कक्षा 5 के लिए) 2. बाल-संस्कृत-कणिका -- प्रथमो भाग: (कक्षा 6 के लिए) 3. बाल-संस्कृत-कणिका -- द्वितीयो भाग: (कक्षा 7 के लिए) 4. बाल-संस्कृत-कणिका -- तृतीयो भाग: (कक्षा 8 के लिए) Goyal Brothers Prakashan
